Wednesday, February 5, 2014

माध्यम


डूबते सूरज को तू भी तो देखता होगा
गर मैं तुझे न देख सकूँ तो क्या,
यह सूरज तो हम दोनों को एक साथ देखता होगा।
आँखों से झाँक कर दिल के हालात देखता होगा,
मन में छिपि छोटी-सी इक कायनात देखता होगा।
इसी तरह से चन्द्रमा रात देखता होगा,
होंठों तक जो न आई,
दिल पर लिखी बात देखता होगा,
गर मैं तुझे न देख सकूँ तो क्या,
ये सूरज चाँद तो हम दोनों को एक साथ देखते होंगे।
इनके माध्यम से भी यदि हम
एक दूसरे को देख न पाएँ
तो कम से कम एक दुसरे को महसूस तो कर सकते हैं।
  

Thursday, November 7, 2013

अलख रिश्ता

बादलों के शीश पर
आरज़ूओं का गगन,
श्वास हैं पथिक
अनन्त पथ के
मुझको इस जहाँ में चैन
मिल भी पाएगा कहाँ?
है वही मेरा जहाँ
लाँघकर ये आसमाँI
हैं क्षितिज पर तारिकाएँ
मेरे इन्तज़ार में,
जा मिलूँ उन से मैं कैसे
स्यात् यह संभव नहीं
लेकिन उनसे ऊर्जा तो
रही है रात-दिन
मैं वहाँ पहुँचू पहुँचू
ऊर्जा आती रहे
ज़िन्दगी चलती रहेI
और जब चुक जाए
साँसों का हिसाब
ऊर्जा बन जाऊँ में ख़ुद
ऊर्जा ही ऊर्जा

बस यही अरमान हैI

Wednesday, August 21, 2013

उस की चाहत मुझे रहेगी
जब तक रहेगा  जीवन मेरा,
मुझे इस जहाँ में चैंन कहाँ 
बस तुम ही हो मेरा जहाँ।     

Friday, August 9, 2013

आत्म समर्पण

भयानकता वनों की
सूनापन सेहरा का
बेचैनी समुन्दर की
उदासी मौसमों की
बेनियाज़ी पर्वतों की
क्या नाम दूँ तुझको?
कभी ऊपर उठाती है
कभी नीचे गिराती है
कभी हर रास्ता परिचित
कभी हर राह अनजानी
मेरी मंज़िल अगर तू है
तो ले ऐ ज़िन्दगी
मैं बैठता हूँ
हारकर, थककर।    

Wednesday, July 24, 2013

हर पल, हर लम्हा तुझे याद करता हूँ
हर जन्म में तुझे पाने की आस करता हूँ
जीवन भी तेरा है कायनात भी तेरी
फिर भी इस घर से उस घर जाने की
फ़रियाद करता हूँ